विज्ञान यह कहता है कि जल के अन्दर किसी भी चीज को 90 डिग्री पर नहीं खड़ा किया जा सकता है परन्तु मै यह दावा करता हूं कि पानी में आराम से 90 डिग्री पर विभिन्न आसनो को किया जा सकता है।
हमारे यहॉ कहा जाता हैं कि भगवान श्रीकॄष्ण को वासुदेव जी ने अपने हाथों में ऊपर उठा कर पूरी यमुना नदी पार कर गए थे और यह कार्य उन्होंने चल कर किया था। इसी से प्रेरित होकर मैने भी 90 डिग्री पर विभिन्न योग मुद्राओं को सफलता पूर्वक प्रस्तुत किया। वर्तमान समय में पानी के अंदर खडे होना, चलना और दौडना मेरे लिए जमीन पर यह कार्य करने के समान है। इतना ही नहीं पानी में चलते हुए निश्चित सीमा तक के वजन एवं बंदूक से फायरिंग भी आसानी से कर सकते हैं।
इसके अलावा पानी के अंदर भगवान श्रीकॄष्ण के समान सेज सैय्या की मुद्रा, भगवान विष्णु की मुद्रा आदि को आसानी से प्रस्तुत किया जा सकता है।
इसके साथ-साथ पद्मासन, शवासन, बज्रासन, कुक्कुट आसन, एवं ऐसे सभी आसनों को पानी में आसानी से किया जा सकता है जो जमीन पर किया जाता है। पानी के अंदर जल क्रीडा के तहत अलग-अलग मुद्राओं को भी योग के माध्यम से आसानी से प्रस्तुत किया जा सकता हैं जिसमें प्रमुखतः 90 डिग्री पर नमस्कार मुद्रा, सावधान मुद्रा, एक पैर के माध्यम से जिमनास्ट, दोनो पैर के माध्यम से तथा 90 डिगी पर रहते हुए अपने पैरों को मुंह से चूमना आदि प्रमुख हैं।
जल से डरना नहीं चाहिये बल्कि उसमें आराम किया जा सकता है, खेला जा सकता है, चला जा सकता है, और दौडा भी जा सकता है। पर आवश्यकता है दृढ संकल्प की। तैराकी एवं जल योग एक ऐसी विधा है जो मनुष्य को न सिर्फ स्वस्थ्य रखता है बल्कि स्फूर्ति भी प्रदान करता है।
लाभ - सम्पूर्ण योग को पानी में ही किया जा सकता हैं क्योंकि पानी के अंदर व्यक्ति में एकाग्रता अधिक हो जाती हैं।
पानी में तैरने पर एक निश्चित उम्र तक व्यक्ति की लम्बाई बढ़ती है।
जलयोग के जरिए व्यक्ति के अंदर शक्ती एवं ताकत का भरपूर प्रवाह रहता है।
इसके माध्यम से सभी रोगों से लडने की क्षमता आ जाती है एवं वह धीरे-धीरे स्वतः ही ठीक होने लगते हैं।
हडि्डयों के रोगों को जल योग के जरिए आसानी से दूर किया जा सकता है।
जल योग के माध्यम से व्यक्ति की उम्र एवं शक्ती स्वतः ही बढ जाती हैं।